Sunday, August 14, 2011

बेकार है ऐसी आज़ादी!


हर साल 15 अगस्त आते ही एक अजब सी खुशी सा अहसास होता है। हर तरफ राष्ट्रिए गीत बजते रहते हैं। स्कूलों में बच्चे रंगबिरंगे प्रोग्राम पेश करते हैं। हर किसी के हाथ में झण्डा होता है। लोग अपने उन मासूम बच्चों के हाथ में भी तिरंगा थमा कर खुद भी खुश होते है और उसे भी खुशी का अहसास दिलाते हैं जो ठीक से तिरंगा को संभाल भी नहीं पाता। यह सब देखकर जो खुशी मिलती है उसे लफ्जों में बयान नहीं किया जा सकता। हमें आज़ाद होने का अहसास होता है। हमारे बड़े हमें यह कहानी सुनाते हैं की किस तरह हमारे बाप दादाओं ने अंग्रेजों से लड़ाई की , अपनी जानें गँवाईं और न जाने कितने लोगों की कुर्बानी के बाद हमें यह आज़ादी नसीब हुई है और हम एक आज़ाद मुल्क में सांस ले रहे हैं। मगर इमानीदारी से देखा जाये तो यह सब चीज़ें कहने सुनने में जितनी अच्छी लगती है प्रैक्टिकल में उतनी अच्छी नहीं हैं।
ज़रा ग़ौर कीजिये किया वाकई में हमारा मुल्क आज़ाद है। किया यहाँ हर कोई चैन की सांस ले रहा है। किया हर किसी की बुनयादी जरूरतें पूरी हो रही है। किया बेगुनाहों के साथ इंसाफ हो रहा है, मजदूरों को उचित मजदूरी मिल रही है, और न जाने ऐसे ही कितने सवाल है जिसका सीधा सा जवाब है नहीं। इस देश में अमीर, अमीर ही होता जा रहा है और जो ग़रीब है वो खुद और उसके बीवी बच्चे भी दो वक़्त की रोटी के लिए दिन रात मेहनत कर रहे हैं। यहाँ बहुत कम लोग ऐसे हैं जो खुश है। न बच्चा खुश है न बूढ़ा खुश है और न ही जवान। बच्चा कूपोषण का शिकार है। जो किसी तरह खुदा की महरबानी से बचपन में ही नहीं मारता और कुछ जी लेता है वो बच्चा मजदूरी करने के लिए मजबूर है। सरकार के पास बच्चों की भलाई के लिए एक दो नहीं बल्कि कई योजनाएँ हैं मगर किया इन योजनाओं का लाभ उन बच्चों को मिल रहा है जिन के लिए यह योजनाएँ बनी हैं। सर्वशिक्षा अभियान के तहत सरकार ने बच्चों के किताबें और खाना का इंतज़ाम तो कर दिया मगर किया ऐसे स्कूलों की संख्या हजारों या लाखों में नहीं है जहां बच्चों के लिए आने वाला राशन कोई और ले जाता है। किया यह सही नहीं है की हमरे देश में लाखों की संख्या में बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। किया यह सहीं नहीं है की जिन बच्चों को स्कूल में होना चाहिए वो कहीं मजदूरी कर रहे हैं। जिन मासूम बच्चों के हाथों में किताब और पेंसिल होनी चाहिए वो किसी ढाबे में किसी का जूठा बर्तन धो रहा है या फिर चाय की दुकान में छोटू छोटू की आवाज़ पर आया बाबू जी की आवाज़ लगा रहा ही। 15 अगस्त के दिन ही देख लीजिये जहां अमीरों के बच्चे रंग बिरंगे कपड़ों में स्कूल में मज़ा कर रहे होते हैं वहीं ग़रीब के बच्चे उसी स्कूल के पास कूड़ा बीन रहे होते हैं। आपको ऐसे बहुत से स्कूल मिल जाएँगे जहां एक तरफ जहां कुछ बच्चे स्कूल में प्रोग्राम पेश कर रहे होते है वहीं स्कूल के गेट से कुछ बच्चे अपने हाथों में कूड़ा की गठरी लिए अंदर प्रोग्राम कर रहे बच्चों को झांक रहे होते हैं। आखिर इन ग़रीब बच्चों के लिए किया मतलब है इस आज़ादी का। अंग्रेजों के जमाने में भी इन्हें रोटी नसीब नहीं थी और आज जबकि देश आज़ाद हो गया है तो आज भी इन्हें रोटी नसीब नहीं हो रही है। इन ग़रीब बच्चों के माँ बाप पहले अंग्रेजों की ग़ुलामी करते थे अब बड़े जमींदारों की गुलामी करते हैं।
अब बात करें नौजवानों की। देश में सब से ज्यादाह परीशन नौजवान ही हैं। जो नहीं पढ़ सका वो भी और जिस ने पढ़ाई कर ली वो भी नौकरी के लिए दर दर भटक रहा है। बेरोजगारी का यह आलम है की पी एच डी कर चुके लोग चपरासी की नौकरी के लिए आवेदन कर रहे हैं। सरकार ने एक न्यूनतम मजदूरी तय कर रखी है मगर करोड़ों की संख्या में ऐसे नौकरीपेशा हैं जिन्हें सरकार दूवारा तय न्यूनतम मजदूरी से कम पैसा मिल रहा है। अनपढ़ तो कई प्रकार के काम कर लेते हैं पढे लिखे अधिक परीशन हैं। उनकी समस्या यह है की वो हर काम कर नहीं सकते और जो कर सकते हैं उसमें उन्हें नौकरी नहीं मिलती और अगर किसी तरह चप्पल घिसने के बाद नौकरी मिल भी जाती है तो तनख्वाह इतनी होती है की एक वक़्त खाओ तो अगले वक़्त का सोचना पड़ता है। बेरोजगारी और फिर उसकी वजह से ग़रीबी ने लोगों का जीना हराम कर रखा है। आए दिन ऐसी खबरें सुनने को मिलती हैं की फलां गाँव में फलां वायक्ति ने ग़रीबी से तंग आकार पहले अपने मासूम बच्चो को मारा और फिर खुद भी जान दे दी। हद तो यह है की जिस देश में हम आज़ादी की खुशी मानते हैं वहाँ भूख से भी लोग मर रहें हैं। ज़रा सोचिए जिस देश में हजारों टन अनाज रखे रखे सड़ जाता है उस देश में भूख से किसी की मौत हो जाना उस पूरे देश के लिए शर्म की बात नहीं तो और किया है। जिस देश को किसानों का देश कहा गया है वहाँ किसानों के साथ ही धोखा हो रहा है। कहीं किसानों से ज़मीन छीनी जा रहाई है तो कहीं किसान क़र्ज़ के बोझ से दबकर खुदकुशी कर रहे हैं। बूढ़ों की ज़िंदगी तो और भी बुरी है। जब चुनाव होता है तो यह बूढ़े तकलीफ उठा कर अपने बच्चों के कंधे पर बैठ कर वोट देने जाते हैं मगर जब उन्हें राशन और पेंशन की ज़रूरत होती है तो उनकी आंखे ताकती ही रह जाती हैं। इस देश में वही आज़ाद है जिसके हाथ में लाठी है और वही लोग मज़े कर रहे हैं जो इन लाठी वालों के साथ है। केंद्र की लाठी सोनिया के हाथ में हैं इसलिए उनके लोगों ने बाबा रामदेव और उनके लोगों पर लाठीयान बरसाईं और किसी का कुछ नहीं बिगड़ा। उसी तरह बिहार में इन दिनों लाठी नितीश कुमार के पास है उनके पोलिसे वालों ने फारबिसगंज में बेगुनाह मुसलमानों को मौत के घाट उतारा मगर वहाँ भी किसी का कुछ नहीं बिगड़ा। ग़रीब की सुनने वाला कोई नहीं है। राजनेताओं में अधिकतर का मक़सद यही होता ही की अधिक से अधिक पैसे बनाए जाएँ। किसी को देश सेवा से कुछ लेने देना नहीं है सब फालतू की बातें हैं। आज देख लीजिए हर ओर से भरष्टाचार की खबरें आ रही हैं। जिसे जब मोका मिला उसने देश को लूटा । पहले अंग्रेजों ने लूटा अब अपने ही लूट रहे हैं।
हमारे देश में योजनाओं की कमी नहीं है। मगर उनमें अधिकतर या तो कागज़ पर ही काम करती है या फिर उनसे सिर्फ उन्हीं लोगों को लाभ होता है जो दाव पेंच में माहिर होते है। जो ग़रीब हैं उन्हें इंद्रा आवास का घर नहीं मिल रहा और जो पैसे वाले हैं उनहों ने कई कई घर ले रखे हैं। ग़रीबों का नाम बी पी एल में नहीं है और जिनकी आय हजारों में है वो बी पी एल के मज़े ले रहे हैं। ग़रीब आदमी एक लीटर किरासन के लिए तरस रहा है और अमीरों के यहाँ तेल भरे पड़े हैं। किया आज़ादी का यही मतलब होता है? जब भूक से लोग मरते रहें, किसान खुदकुशी करते रहें, प्रसव के दौरान मामूली दावा की कमी से महिलाओं के मौत होती रहे, बच्चे स्कूल के बजाए चाय की दूकान पर काम करते रहें, लाखों लोग ज़िंदगी भर फूटपथ पर सोने को मजबूर हों तो ऐसे में किया यह कहना उचित नहीं है की बेकार है ऐसी आज़ादी।

Thursday, November 13, 2008

आतंकवाद पर दोहरा मापदंड

यह बड़े अफ़सोस की बात है की भारत में आए दिन आतंकवादी घटनाएँ घटती रहती हैं। इस प्रकार की हर घटना के बाद बड़ी आसानी से कह दिया जाता है की इनके पीछे किसी मुस्लिम संगठन का हाथ है। मुस्लमान बार बार यह कहते रहे की कोई भी सच्चा मुस्लमान कभी किसी बेक़सूर की जान नही ले सकता। मगर हर मर्तबा किसी न किसी बात को बहाना बनाकर मुसलमानों को बदनाम किया गया। अब जबकि मलेगओं बम धमाके के सिलसिले में कई हिंदू गिरफ्तार हो रहे हैं तो कोई यह नही कह रहा है की हिंदू भी आतंकवादी हो सकते है। आख़िर यह दोहरा मापदंड क्यों।
सच्चाई यह है की आतंकियों का कोई धरम नही होता। उसका एक ही मकसद होता है बेक़सूरों की जान लेकर लोगों में दहशत फैलाना। ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त करवाई होनी चाहिए। उन पर करवाई के दौरान यह नही सोचना चाहिए की वोह हिंदू है या मुस्लमान। सब से अफ़सोस की बात तो यह है की पहले साध्वी, फिर सेना के जवान और अब स्वामी इस सिलसिले में गिरफ्तार हुए हैं। इस से अधिक खतरनाक बात और क्या हो सकती है की एक सेना का जवान जिस पर देश की रक्षा करने की ज़िम्मेदारी होती है वोह आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त है। ऐसा आदमी देश की सुरक्षा के लिए काफी नुकसान देह साबित हो सकता है। खुदा हमारे मुल्क की हिफाज़त करे.

Tuesday, November 11, 2008

अलविदा गांगुली

वैसे तो क्रिकेट में खिलाड़ी विदा होते ही रहते हैं मगर कुछ खिलाडिओं की विदाई कुछ खास होती है। ऐसी ही खास विदाई सौरव गांगुली की होई है। गांगुली हिंदुस्तान ही नही बल्कि दुनिया के कुछ खास खेलाडिओं में से एक हैं। एक प्लेयर के तौर पर तो वोह सफल रहे ही एक कैप्टेन के तौर पर वोह भारत के सब से सफल कप्तान साबित हुए। वैसे तो गांगुली के करियर में कई विवाद आए मगर इस सब के बावजूद उन्हों ने इंडिया टीम में जो स्पिरिट पैदा की वोह किसी दूसरे कप्तान के दौर में नही देखा गया। वैसे तो हर दौर में अच्छे खिलाड़ी आते रहें है और आते रहेंगे मगर अपने कुछ खास स्टाइल की वजह से गांगुली ने इंडियन क्रिकेट को एक खास पहचान दिलाई थी जिसे भुला पाना मुश्किल होगा। टेस्ट में जहाँ वोह भारत के सब से सफल कप्तान है वहीँ ओने एक दिवसिये मैचों में वोह भारत के अजहरुद्दीन के बाद दूसरे सब से सफल कप्तान हैं।
जो लोग गांगुली को समय से पहले क्रिकेट छोड़ने की सलाह दे रहे थे उनको भी अपनी गलती का अहसास तब हुआ जब गांगुली ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मोहाली टेस्ट में शानदार शतक बनाया। अपनर करियर के अन्तिम टेस्ट में भी नागपुर की पहली इनिंग में उन्हों ने ८५ रन बनाये। गांगुली अब हमें शायद मैदान पर नज़र नही आयें मगर हम उनके खास अंदाज़ को हमेशा याद रखेंगे.

Saturday, November 8, 2008

जाकिर नायक के खिलाफ फतवा

काजी मुफ्ती अब्दुल इरफान ने जाने माने iसलामी विदुआन जाकिर नायक के खिलाफ कुफ्र का फतवा जारी किया है । दुनिया भर में इस्लाम के हजारों जानकार हैं और कई मामलों में सब के अपने अपने विचार हैं। इस्लाम के कई अहम् इस्सुए ऐसे हैं जिन उलमा मैं इख्तिलाफ है मगर इसका मतलब यह नही है की किसी के खिलाफ फतवा जरी कर दिया जाए। जाकिर नायक सिर्फ़ हिंदुस्तान ही नहीं बल्कि साडी दुनिया में अपनी न सिर्फ़ इस्लाम बल्कि दिनया के मुख्तलिफ धर्मों के बारे में अपनी बेहतरीन जानकारी के लिए जाने जाते हैं.हर कोई उनकी बातों को गौर से सुनता है। उनसे कुछ ग़लती हो सकती है मगर कोई ज़रूरी नहीं है की जो कोई उन्हें ग़लत कह रहा है वोह सही कह रहा हो। यदि उनकी किसी बात पर किसी को इख्तिलाफ है तो मिल बैठ कर इसका हल निकला जन चाहिए। अभी मुसलमानों के लिए सब से ज़रूरी यह है की आपस में मिल कर रहा जाए और दूसरे धरम के लोगों के सामने इस्लाम की सही तस्वीर पेश की जाए। इसी में मुसलमानों की भलाई है। एक दूसरे के खिलाफ बयान देकर इस्लाम और मुस्लमान का भला नही हो सकता.

Friday, November 7, 2008

laxman का कमाल

आख़िर कर हिंदुस्तान ही नही बल्कि दुनिया के बेहतरीन स्टाइलिश बल्लेबाज़ लक्ष्मण ने अपने १०० टेस्ट पुरे कर लिए । इसके लिए वोह बधाई के पात्र हैं। उनसे पहले यह कमल भारत के केवल आठ बल्लेबाजों ने किया है.वैसे तो लक्ष्मण सभी देशों के विरुद्ध सफल रहे मगर ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध वोह कुछ ज़ियादः ही कामयाब रहे। ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध उन्हों ने २००० से अधिक रन बनाये। ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध उन्हों ने दो बार डबल शतक बनाया। २००१ में कोल्कता में २८१ रन की परी को भला कौन भूल सकता है। उनकी इस परी से भारत न केवल बेहतर पोसीशन में आ गया था बल्कि जीत भी हासिल की थी। दिल्ली में खेले गए तीसरे टेस्ट में पहली परी में २०० और दूसरी परी में भी अर्ध शतक बनाकर उन्हों ने साबित कर दिया है की उनमें अभी काफी जान बाकुई है और वोह अभी भर को अपनी सेवाएँ देते रहेंगे.

Saturday, November 1, 2008

पुलिस मुस्लिम मुलाक़ात

इस में किसी को एतेराज़ नही होना चाहिए की आज ऐसा माहोल बन गया है जिसमें लोग और मीडिया समझ एः है की बतला हाउस एनकाउंटर के बाद पुलिस और मुसलमानों में दूरी बढ़ी है । इसी दूरो को कम करने और मुल्क में मुसलमानों की सही तस्वीर पेश करने के लिए जामिया नगर में रहने वाले पत्रकारों ने जामिया नगर के लोगों और दी सी पी के साथ एक मुलाक़ात कराइ। परवेज़ आलम खान यावर रहमान और शहीद सिद्दिकुई जैसे पत्रकारों नें मिलकर एक तंजीम जर्नलिस्ट असोसिएशन फॉर पीपुल (जप)। जप के programme के dauran दकप अजय chaudhry ने कहा की बतला हाउस एनकाउंटर के बाद अगर आपको ऐसा lgta है की आप ग़लत जगह पर रह rahein हैं to ऐसी सोच ग़लत है। एक दो ग़लत लोगों की wajah से पुरा elaqa badnam नही ho जाता .unhon ने लोगो से appeal की के पुलिस पर bharosa karein woh आपकी मदद से ही कम कर सकती है। इस awsar पर जप के president परवेज़ ने लोगों से कहा की आप हम पर bharosa karein और हमारे पास aayen हम आपकी हर मुमकिन मदद करेंगे। vice presedent यावर रहमान नें जप का maqsad bayan किया और कहा की आज पुलिस और musalman में जो gap है हमारा paqsad उसी gap को कम करना है.