यह बड़े अफ़सोस की बात है की भारत में आए दिन आतंकवादी घटनाएँ घटती रहती हैं। इस प्रकार की हर घटना के बाद बड़ी आसानी से कह दिया जाता है की इनके पीछे किसी मुस्लिम संगठन का हाथ है। मुस्लमान बार बार यह कहते रहे की कोई भी सच्चा मुस्लमान कभी किसी बेक़सूर की जान नही ले सकता। मगर हर मर्तबा किसी न किसी बात को बहाना बनाकर मुसलमानों को बदनाम किया गया। अब जबकि मलेगओं बम धमाके के सिलसिले में कई हिंदू गिरफ्तार हो रहे हैं तो कोई यह नही कह रहा है की हिंदू भी आतंकवादी हो सकते है। आख़िर यह दोहरा मापदंड क्यों।
सच्चाई यह है की आतंकियों का कोई धरम नही होता। उसका एक ही मकसद होता है बेक़सूरों की जान लेकर लोगों में दहशत फैलाना। ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त करवाई होनी चाहिए। उन पर करवाई के दौरान यह नही सोचना चाहिए की वोह हिंदू है या मुस्लमान। सब से अफ़सोस की बात तो यह है की पहले साध्वी, फिर सेना के जवान और अब स्वामी इस सिलसिले में गिरफ्तार हुए हैं। इस से अधिक खतरनाक बात और क्या हो सकती है की एक सेना का जवान जिस पर देश की रक्षा करने की ज़िम्मेदारी होती है वोह आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त है। ऐसा आदमी देश की सुरक्षा के लिए काफी नुकसान देह साबित हो सकता है। खुदा हमारे मुल्क की हिफाज़त करे.
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1 comment:
इसमे दोहरे मानदंड वाली तो कोई बात ही नही है जहाँ जिसने धमाके किए वे ही पकड़े जा रहे है मालेगांव में यदि हिंदू कट्टर वादियों ने धमाके किए है तो वहां वे ही पकड़े जा रहे है उनके बदले मुस्लमान तो नही पकड़े गए | यह धारणा बिल्कुल ग़लत है कि बम चाहे कोई भी फोडे पकड़े मुस्लमान ही पकड़े जाते है यदि एसा ही होता तो मालेगांव धमाको में भी प्रज्ञा और उसके साथियों कि जगह मुस्लमान ही पकड़े जाते |
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